Ved Vyas Biography In Hindi

Ved Vyas Biography In Hindi

Sharing is caring!

नाम (Name)महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास (Vyasa)
माता का नाम (Mother Name)सत्यवती (मत्स्यगंधा)
पिता का नाम (Father Name)ऋषि पराशर

वेदव्यास जी बचपन से ही बेहद बुद्धिमान और आसाधारण बौद्धिक क्षमताओं वाले व्यक्ति थे, वे किसी भी विषय को बेहद जल्दी और एक ही बार में समझ जाते थे, वेदव्यास जी पर अपने पिता महर्षि पराशर के गुण आ गए थे, वे अपने पिता पराशर को अपना गुरु भी मानते थे, उन्हें अपने पिता से भी ज्ञान प्राप्त किया था, वेदों का ज्ञान लेने के बाद ही वे वेद-पुराण में पारंगत हो गए थे।

यही नहीं महज 16 साल की उम्र में ही अपनी अद्भुत और आसाधारण बौद्धिक क्षमता के माध्यम से धार्मिक कामों की शुरुआत कर दी थी। उन्हें छोटी सी उम्र में ही समस्त शास्त्रों, वेदों और पुराणों का ज्ञान हो गया था, उस समय उनकी बराबरी करने वाला अन्य कोई नहीं था।

वेदों का विस्तार

अपने अतुलनीय ज्ञान और वेदों का विस्तार करने की वजह से उन्हें वेदव्यास के नाम से जाना जाने लगा। इसके साथ ही बदरीवन में निवास करने के कारण उन्हें बादरायण के नाम से भी लोग पुकारते थे। आपको बता दें कि अपने अतुल्य ज्ञान की बदौलत वेद व्यास जी ने चारो वेदों के विस्तार के साथ-साथ 18 महापुराणों और ब्रह्मसूत्र की भी रचना की।

भगवान विष्णु के अवतार के रुप में वेद-व्यास

हिन्दू पुराणों के मुताबिक भगवान विष्णु ने ही व्यास के रूप में अवतार लेकर वेदों का विस्तार किया था वहीं जब वेद व्यास जी ने धर्म का विनाश और ह्रास होते हुए देखा था तो इन्होंने वेदों को चार अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर दिया और वह वेदव्यास कहलाए जाने लगे।

वेदों का विभाग कर उन्होंने अपने शिष्य सुमन्तु, पैल, वैशम्पायन और जैमिनी तथा पुत्र शुकदेव को उनका अध्ययन कराया। इसके साथ ही महाभारत का उपदेश दिया। इनकी चमत्कारिक दैवीय शक्ति और अलौकिक प्रतिभा की वजह से लोग इन्हें भगवान विष्णु के अवतार के रुप में जानते हैं, इसके साथ ही वेदव्यास जी को संसार में ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने के लिए भी जाना जाता है।

गुरुपूर्णिमा के दिन मनाई जाती है व्यास जयंती

हिन्दू धर्म के महाकाव्य महाभारत, 18 पुराण, श्रीमद्भागवत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा जैसे अद्वितीय साहित्य-दर्शन के प्रणेता वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को हुआ था, इसलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा और व्यास जी की जयंती के रुप में भी मनाया जाता है। उन्हें गुरुओं के गुरु भी कहा जाता है।

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
shares
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x