napoleon biography in hindi

Napoleon Bonaparte biography in hindi । नेपोलियन बोनापार्ट

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Napoleon Bonaparte biography in hindi:-

पूरा नाम – नेपोलियोनि दि बोनापार्टे
जन्म     – 15 August, 1769
जन्मस्थान – अज़ाशियो
पिता     – कार्लो बोनापार्ट
माता     – लेटीजिए रमोलिनो
विवाह   –  मेरी लुईस के साथ

अपनी योद्धा प्रवृत्ति के कारण नेपोलियन बोनापार्ट सेना में भर्ती हो गये और 1792 में उन्होंने टूलों का विद्रोह सफलतापूर्वक दबाकर अपनी योग्यता का परिचय दिया। 1796 में उन्होंने इटली के राज्यों को परास्त किया और यही से उनके उद्भव की कहानी प्रारंभ होती है। उनकी प्रसिध्द उक्ति है। –

असंभव शब्द मूर्खो के शब्द कोष में पाया जाता है।’

फ़्रांस में उनकी निरंतर बढ़ती लोकप्रियता एवं शक्ति से आशंकित हो तत्कालीन सरकार ने उन्हें 1798 में मिस्र भेज दिया था। 1799 ने वो फ़्रांस लौटे और त्रिसदस्यीय मंत्रिपरिषद का अंग बना दिया गया। फिर नेपोलियन ने स्वयं को दस वर्ष के लिए प्रथम कौंसल घोषीत करके अन्ततः 1804 में सम्राट की उपाधि धारण कर ली। फ़्रांस का सम्राट बनने के पूर्व वह अनेक युध्दों में विजय प्राप्त कर चुके थे।

2 दिसंबर, 1805 में आस्ट्रिया और रूस पर विजय प्राप्त करने के बाद 14 अक्तुबर,1806 को उन्होंने प्रशा को पराजित किया इससे लगभग संपूर्ण युरोप पर उसका आधिपत्य हो गया। नेपोलियन ‘टिलसित की संधि’(1807) के समय शिखर पर था। ‘सिविल कोड’, ‘लीजियन ऑफ़ ऑनर’, ‘इम्पीरियल बैक’, ‘कॉन्काड्रेट’, ‘राइन संघ’आदि नेपोलियन की ही अमर दें है।

नेपोलियन ने ‘महाद्वीपीय मैत्री संघ’ की स्थापना द्वारा ब्रिटेन के व्यापार की क्षति पहुचाकर उसे पराजित करने की योजना बनायीं। रूस द्वारा इसका विरोध करने पर नेपोलियन ने 1812 में उस पर आक्रमण कर दिया रूस पराजित हुआ पर युध्द में नेपोलियन की सैन्यशक्ति क्षीण हो गई। युरोप के अनेक देश अब उसके विरुध्द अपनी सैन्यशक्ति बढ़ाने लगे।

1813 में लिपजिग के युद्ध में नेपोलियन की पराजय हुई और उन्हें फ़्रांस छोड़कर एल्बा द्वीप में बसना पड़ा परन्तु दुसरे ही वर्ष वो पुन: लौट कर सत्ता में आ गये पर अब उनका स्वास्थ गिर चूका था।

1815 में वाटरल के युध्द में बहुराष्ट्रीय संयुक्त सेना ने उन्हें पराजित कर सेंट हेलेना द्वीप भेज दिया गया जहा 5 मई, 1821 को उदर कैंसर से उनकी मृत्यु हो गई।

नेपोलियन बोनापार्ट का फ़्रांस ही नहीं, बल्कि विश्व के महान युध्दनायकों में अग्रणी स्थान है, वो वास्तव में क्रांतिपुत्र थे और उन्होंर युरोप का नक्शा ही बदल दिया था। नेपोलियन ने फ़्रांस को ‘समानता’ का सिध्दांत दिया, उनकी ऊंचाई कम होने के कारण उन्हें ‘लिटिल कॉरपोरल’ भी कहते थे, पर शौर्य की जिन ऊंचाईओ को उन्होंने छुआ, उसे चुनौती देना किसी भी वीर के लिया सहज नहीं।

मृत्यु  – 5 मई, 1821  कैंसर से उनका मृत्यु

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