Lenovo Success Story in Hindi | Liu Chuanzhi in hindi

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दोस्तो जो लोग लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजें यूज़ करते होंगे वह तो Lenovo ब्रांड से अच्छी तरह से वाकिफ होंगे |

लेकिन जो लोग इस ब्रांड को नहीं जानते उन्हें मै बता दूं कि “Lenovo Group Ltd.” जिसे की “Lenovo PC International” के नाम से भी जाना जाता है, एक चाइनीज मल्टीनेशनल कंपनी है |

जो आमतौर पर पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, स्मार्ट फोन, स्मार्ट टीवी, और इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस जैसी बहुत सारी प्रोडक्ट को डिजाइन डेवेलप और बेचने का काम करती है |

और दोस्तों लेनोवो 2013 के बाद से सेल्स यूनिट के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा PC वेंडर है और आज के समय में यह 60 से ज्यादा देशों में काम करता है और लगभग 160 देशों में अपने प्रोडक्टस को बेचता है |

और इस कंपनी के फाउंडर का नाम है लियू चुआनझी | जिन्होंने काफी संघर्षों के बाद यह कंपनी शुरु किया और इसे शिखर पर पहुंचाया |

यहां तक कि वे शुरुआती दौर में खुद पर्सनल कंप्यूटर्स को साइकिल पर रखकर डिलीवर करने जाते थे |

और IBM जैसी बड़ी कंपनी के PC बिजनेस को खरीदने वाले इस शख्स ने, कभी अपने पिता के पुराने सूट पहन IBM के एजेंट के तौर पर, सबसे पीछे वाली लाइन में बैठा करते थे |

तो चलिए दोस्तों लेनोवो ब्रांड के इस इंस्पिरेशनल जर्नी को हम शुरू से जानते हैं |

तो दोस्तों कहानी की शुरुआत होती है 1944 से जब चीन के शंघाई के पास झेजियांग नाम की जगह पर लियू चुआनझी का जन्म हुआ |

अपनी स्कूलिंग और ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने मिलिट्री पायलट बनने के लिए सारे एग्जाम भी पास कर लिये लेकिन भर्ती के समय उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि वे मिलिट्री में काम करने के लायक ही नहीं |

जिसके बाद लियू ने कंप्यूटर से संबंधित पढ़ाई करने की सोची और फिर उन्होंने जीडीयान यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया | हालांकि उनकी ग्रेजुएशन के सब्जेक्ट कुछ ऐसे थे कि उन्हें यहां पर अपनी मनपसंद सेक्शन नहीं मिल पाई और उन्हें राडार की पढ़ाई से काम चलाना पड़ा |

हालांकि उन्हें यहां पर कंप्यूटर को जानने का अच्छा खासा मौका मिल गया |

आगे चलकर 1970 में उन्होंने किया CAS यानी चाइना अकेडमी ऑफ़ साइंस में काम किया | लेकिन वहां काम करते हुए वे अपनी सैलरी बिलकुल भी खुश नहीं थे | उन्हें सिर्फ 100 युवान हर महीने के मिलते थे | और दोस्तों बता दूँ की 1 युवान भारतीय लगभग 9.75 रुपी के बराबर होता है |

अपनी कम सैलरी से परेशान हो कर 1 नवंबर 1984 को लियू ने 10 लोगों के साथ मिलकर एक छोटी सी कंपनी खोली और इसके लिए उन्होंने कुछ फंड अपनी पहली कंपनी से लोन में लिए थे | और इस कम्पनी का नाम लियू ने “लिजेंड” रखा था |

हालांकि इस कंपनी को शुरुआती दिनों में फंडिंग के लिए बहुत सारी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ी क्योंकि उन दिनो स्टार्टअप के लिए चीन की सरकार का कोई भी सपोर्ट नहीं था |

उन्होंने इस मुश्किल हालातों में टेलीविजन इंपोर्ट करने का प्रयास किया लेकिन उसमें भी फेल हो गए |

और फिर डिजिटल वॉच मार्केट में हाथ बढ़ाया लेकिन उनका यह काम भी नहीं चल सका |

दरसल 10 लोगों की टीम में किसी को भी बिजनस का ज्यादा नॉलेज नहीं था | लेकिन गलतियों से सीखते हुए लियू और उनके साथ ही आगे बढ़ते रहें |

और फिर 1985 में लीजेंड ने कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाले एक सर्किट बोर्ड को डेवलप किया जिसे की IBM को बेचने में वे सफल रहे और यह लियू के कम्पनी की यह सबसे पहली सफलता थी |

1988 में लियू चुआनझी ने हांगकांग में अपनी कम्पनी का एक और ऑफिस खोला और कुल 5 एम्प्लाइज के साथ वहां पर शिफ्ट हो |
इस कंपनी के जरिए, वे हेवलेट पैकर्ड जिसे की हम HP के नाम से जानते हैं और तोशिबा के कंप्यूटर को डिस्ट्रीब्यूट करने का काम करने लगे |

और इस काम में पैसे बचाने के लिए उन्होंने खुद और अपने साथियों के साथ ………साइकल पर, और पैदल ज्यादा कर कंप्यूटरस को डिस्ट्रीब्यूट किया |

और कुछ इसी तरह से तरह जल्दी उनकी मेहनत रंग लाई और लिजेंड चीन की सबसे बड़ी “कंप्यूटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क” बन गई |

1980 में कंपनी ने लीजेंड ब्रांड नेम के तहत खुद की कंप्यूटर बनानी और बेचनी शुरू की | और फिर धीरे धीरे यह कंपनी चाइना में प्रसिद्ध होने लगी |

1994 में इसे हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया | और इस टाइम इसका फाइनेंस करीब 30 मिलियन यूएस डॉलर तक पहुंच चुका था | और कम्पनी करीब 1 मिलियन PC बना चुकी थी |

1997 में लिजेंड को चीन का ” बेस्ट सेलिंग कंप्यूटर ब्रांड” के तौर पर पहचान मिली ……..यहां तक इसने चाइना के मार्केट लीडर IBM तक को पीछे छोड़ दिया था |

साल 2000 में लिजेंड की तैनेक्सी नाम की कंप्यूटर की 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकी , और यह कम्प्यूटर चीन का बेस्ट सेलिंग कम्प्यूटर बन गया |

2002 में कम्पनी ने मोबाइल फोंस बनानी भी शुरू कर दी |

और फिर आगे चल कर 2003 में लियू ने डेल जैसे वर्ल्ड फेमस ब्रांड से कम्पटीट करने के लिए, अपने कम्पनी का नाम “लीजेंड कंप्यूटर को लिमिटेड” से बदलकर “लेनवो ग्रुप लिमिटेड” कर दिया | और इसी साल उन्होंने अपनी ब्रांडिंग लिए 200 मिलियन युवान खर्च किये थे |

2006 में लेनवो ने विंडोस ऑपरेटिंग सिस्टम खरीदने के लिए करीब 1 बिलियन डालर की डील की | इससे पहले चाइना में ज्यादातर कम्प्यूटर्स बिना os के ही मिला करते थे |

और भारत में लेनवो की पहचान तब बढ़ी जब 2012 में तमिलनाडु सरकार ने 1 मिलियन लैपटॉप बल्क में आर्डर किया था |

और लेनवो लैपटॉप की सबसे फेमस सीरिज थिंकपैड के 2015 तक 100 मिलियन यूनिट्स बेचे जा चुके थे |

तो दोस्तों ये थी लेंनवो ब्रांड की स्टोरी जिसे 10 लोगों के साथ शुरू किया गया और आज इस कम्पनी में 60 हजार से ज्यादा लोग काम करते है |
और इसका रेवेन्यु 2016 के आंकड़ो के अनुसार लगभग 43 billion us डालर है

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