Johny lever biography in hindi

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Johny lever biography in hindi :-

जॉनी लिवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है , इनका जन्म वर्ष 1956 ई० में आँध्रप्रदेश के प्रकाशम् जिले में हुआ था | इनके पिता प्रकाश राव जनुमाला  हिंदुस्तान लिवर कंपनी , महाराष्ट्र में काम करते थे |  यह भी अपने पिता जी के साथ वहीँ चले गए और इनका बचपन महाराष्ट्र के धारावी की झोपड़पट्टी में बिता |
उनकी तीन बहनें और दो भाई हैं | बचपन में पैसों की कमी के चलते जॉनी केवल 7वीं  तक ही पढ़ पाएं | और पैसों की कमी को पूरा करने के लिए कलम  बेचना शुरू क्र दिया | पर इतना सब कुछ करने के बाद भी , उनके घर का खर्च नहीं चल पाता था और कभी-कभी उनको भूखा भी रहना पड़ता था |
अपनी गरीबी से वह इतना परेशान हो गए थे की उन्होंने ट्रैन के आगे कूदकर आत्महत्या करने का फैसला किया | और ट्रैन की पटरी पर जाकर लेट गए , ट्रैन आ रही थी | तभी उनको अपनी बहनों का ख्याल आया , की मेरे मरने के बाद उनका क्या होगा | और वह तुरंत पटरी से हट गए और घर वापस चले आये |
उसके बाद इन्होने भी हिंदुस्तान लिवर कंपनी में काम करना शुरू क्र दिया , जिसमे इनके पिताजी काम करते थे | बचपन से ही इनको फ़िल्मी अभिनेताओं की मिमिक्री(नक़ल करना ) करने का बड़ा शौक था और कंपनी में भी वह अपने वह अपने सहकर्मियों को मिमिक्री करके दिखाते थे | वहीँ उनके एक साथी ने उनको स्टेज शो करने का सुझाव दिया |
और वह स्टेज शो करने लगे , लेकिन इससे भी उनको ज्यादा पैसे नहीं मिल पाते थे | उनके जीवन में सबसे बुरा दिन तब आया जब उनकी एक बहन की मौत हो गयी और इनको स्टेज शो के लिए जाना पड़ा | क्योकिं उनके घर में बहन के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे |  किसी भी भाई के लिए इससे बुरा दिन कभी भी नहीं हो सकता |
एक दिन वह स्टेज शो कर रहे थे , तभी उनको सुनील दत्त (प्रख्यात फिल्म निर्देशक और अभिनेता) ने देखा और उनके अंदर की प्रतिभा को पहचान गए | सुनील दत्त ने जॉनी लीवर को अपनी फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में पहला ब्रेक दिया | इसी फिल्म से जॉनी के फ़िल्मी करियर की शुरुवात हुई | फिल्म ‘बाजीगर’ से उनको  सफलता प्राप्त हुई , और उसके बाद उन्होंने लगभग   350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया |

Johny Lever | Personal life

जॉनी लीवर की पत्नी का नाम सुजाता है , और इनकी एक बेटी(जैमी) तथा एक बेटा(जेस) है | जॉनी की की बेटी जैमी भी कॉमेडियन है | कुछ समय पहले जॉनी का बेटा जेस कैंसर जैसी बीमार से ग्रसित हो गया था , लेकिन भगवान का शुक्र है , की वह बच गया |
इतनी बड़ी सफलता पाने वाले जॉनी से जब उनकी सफलता का राज़ पूछा जाता है तो कहते हैं , की जब भी दुःख और परेशानियां सताती थी तब मैं अपने में केवल एक ही बात बैठा लेता था

” कोई भी चीज़ ज्यादा देर तक नहीं रहती , इसलिए दुःख भी ज्यादा देर तक नहीं रहेगा”

जॉनी लीवर की कहानी यहाँ प्रकाशित करने का उद्देश्य यह है की हमारे अंदर अपनी अलग खूबी है , quality  है , बस हमें उसको  पहचानने की जरुरत है | और अगर हमने उसे पहचान लिया तो फिर हमें इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा |

 

“दूसरे के जैसा मत बनो , खुद के जैसा बनो जिससे लोग तुम्हारे जैसा बनने की चाहत रखें “

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