Irrfan Khan Biography In Hindi

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शाहबजादे इरफान अली खान (इरफ़ान ख़ान, इरफान) हिन्दी अंग्रेजी फ़िल्मों, व टेलीविजन के एक अभिनेता हैं। उन्होने द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग जैसी फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हासिल फिल्म के लिये उन्हे वर्ष २००४ का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वह बालीवुड की ३० से ज्यादा फिल्मों मे अभिनय कर चुके हैं। इरफान हॉलीवुड मे भी एक जाना पहचाना नाम हैं। वह ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर और द अमेजिंग स्पाइडर मैन फिल्मों मे भी काम कर चुके हैं। 2011 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया। 60वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में इरफ़ान खान को फिल्म पान सिंह तोमर में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया।  इरफान खान भारतीय फिल्‍म अभिनेता हैं और वे बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैंा वे अपने हॉलीवुड फिल्‍मों में किए गए कामों की वजह से भी जाने जाते हैंा उन्‍हें तीन बार फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार और सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के तौर पर फिल्‍म ‘पान सिंह तोमर’ के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी मिल चुका हैा उन्‍हें पद्मश्री सम्‍मान से भी नवाजा जा चुका हैा दर्शक ऐसा मानते हैं कि वे अपनी आंखों से ही पूरा अभिनय कर देते हैं और यही उनकी विशेषता भी हैा वे लीक से हटकर फिल्‍में करने की वजह से मशहूर हैा 

        Irrfan Khan (पूरा नाम मोहम्मद इरफ़ान खान- जन्म ४ नवंबर १९६६) का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर  शहर में हुआ था। स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर और स्वदेश में सन ८२-१९८९ तक कार्टून बनाते रहे। दिल्ली की श्रीधरणी आर्ट गैलरी में अपनी प्रदर्शिनी के दौरान वे नवभारत टाइम्स लखनऊ के लिये चुन लिये गए। १९९४ में दिल्ली आकर इकोनोमिक टाइम्स, फ़ाइनेन्शिअल एक्स्प्रेस,एशियन ऐज, में स्टाफ़ कार्टूनिस्ट रहे। २००० में ज़ी न्यूज़ में वरिष्ठ कार्टूनिस्ट के पद पर काम करते हुए अपना टाक शो शख्शियत होस्ट किया, २००३ में एनडीटीवी के शो गुस्ताखी माफ़ की स्क्रिप्ट लिखी और सहारा समय पर इतनी सी बात होस्ट किया। अब तक ३ संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। एन्सीईआरटी के पाठ्यक्रम की पुस्तकों में इरफ़ान सहित देश के विभिन अन्य कार्टूनिस्टों के संपादकीय कार्टूनों को भी शामिल किया गया था। जापान फ़ाउन्डेशन ने “एशियाई कार्टून प्रदशनी” के अपने वार्षिक कार्यक्रम के तहत, २००५ में नौवी प्रदर्शिनी के लिए प्रत्येक एशियाई देश से एक कार्टूनिस्ट के चयन हेतु भारत की ओर से इरफ़ान का चयन किया।

        बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपने अभिनय की छाप छोड़ने वाले अभिनेता इरफान खान को आज पूरी दुनिया जानती हैं। ऑलराउंडर अभिनेता इरफान खान ने अपनी अभिनय के दम पर हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया है। इरफान खान का अपना एक अलग अंदाज है, वो एक ऐसे कलाकार हैं कि अपने जबरदस्त अभिनय से किसी भी किरदार में जान डाल देते हैं। हाल ही में हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स ने कहा कि इरफान की तो आंखें भी एक्टिंग करती हैं। उनके अलग अलग रोल्स की तरह उनकी लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है..आइए जानते है उनके और सुतपा के प्यार की कहानी। इरफान खान का शुरूआती दौर था, इरफान सड़क पर थे। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था, उस वक्त एक लड़की उनकी जिंदगी में आई। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी तब शुरू हुई जब उनका एनएसडी में प्रवेश हुआ। उन्हीं दिनों, उनके पिता की मृत्यु हो गई। घर के आय का स्रोत ही समाप्त हो गया। इरफान के लिए घर से पैसे मिलने के दरवाजे बंद हो गए। पिता की मौत के बाद अब उनके पास बस एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप ही सहारा थी। घरेलु परेशानियों के साथ एनएसडी की परेशानियां सहते-सहते इरफान टूटते जा रहे थे। इन सारी बातों को बड़े गौर से एक लड़की देखा करती थी। वह इरफान की सहपाठी थी, एनएसडी में ही। दिल्ली की रहने वाली थी और उन्‍हें इरफान में दिलचस्पी थी। एक दौर ऐसा भी आया, जब इरफान के पास खाने के लिए लाले पड़ गए। उस दौर में उस दिल्ली की लड़की ने इरफान का साथ दिया। 

        उनके पिता टायर का व्यापार करते थे। पठान परिवार के होने के बावजूद इरफान बचपन से ही शाकाहारी हैं, उनके पिता उन्हें हमेशा यह कहकर चिढ़ाते थे कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया। उन्होंने वर्ष 1984 में दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में अभिनय का प्रशिक्षण लिया। उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली। इरफान खान का शुरुआती दौर संघर्ष से भरा था। जब उनका एनएसडी में प्रवेश हुआ, उन्हीं दिनों उनके पिता की मृत्यु हो गई। घर के आय का स्रोत ही समाप्त हो गया। उन्हें घर से पैसे मिलना बंद हो गया। उनके पास बस एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप ही सहारा थी। जयपुर में पले-बढ़े इरफ़ान ख़ान एमए की पढ़ाई कर रहे थे, जब उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में प्रशिक्षण के लिए स्कॉलरशिप मिला। दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय में प्रशिक्षित होने के बाद इरफ़ान ख़ान  ने मुंबई का रूख किया। मुंबई आने के बाद वे धारावाहिकों में व्यस्त हो गए। चाणक्य, चंद्रकांता, स्टार बेस्ट सेलर्स जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में इरफ़ान ख़ान के बेहतरीन अभिनय ने फिल्म निर्माता-निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। मीरा नायर की सम्मानित फिल्म सलाम बांबे में उन्हें मेहमान भूमिका निभाने का अवसर मिला। सलाम बांबे के बाद इरफ़ान ख़ान लगातार ऑफबीट फिल्मों में अभिनय करते रहें। एक डॉक्टर की मौत,कमला की मौत और प्रथा जैसी समांतर फिल्मों में अभिनय के बाद इरफ़ान ख़ान  ने मुख्य धारा की फिल्मों की ओर रूख किया। हासिल में रणविजय सिंह की नकारात्मक भूमिका में इरफ़ान ख़ान ने अपनी अभिनय-क्षमता का लोहा मनवाया। देखते-ही-देखते वे मुख्य धारा के निर्माता-निर्देशकों की भी पसंद बन गए।

        इरफ़ान ख़ान मौजूदा दौर के उन अभिनेताओं में हैं,जो स्वयं को फिल्मों में नायक की भूमिका के दायरे तक सीमित नहीं करते। वे यदि लाइफ इन ए मेट्रो, आजा नचले, क्रेजी 4 और सनडे जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण चरित्र भूमिकाएं निभाते हैं, तो मकबूल,रोग और बिल्लू में केंद्रीय भूमिका भी निभाते हैं। गंभीर अभिनेता की छवि वाले इरफ़ान ख़ान समय-समय पर हास्य-रस से भरपूर भूमिकाओं में भी दर्शकों के लिए उपस्थित होते रहे हैं। इरफान खान नाम ही काफ़ी है. इनकी एक्टिंग का जादू सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों पर छाया हुआ है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इन्होंने भी अपने जीवन की शुरुआत जूनियर कलाकार से की थी. इरफान को फ़िल्म ‘हासिल’ के लिए पहली बार दर्शकों ने सराहा. 2003 में फ़िल्म ‘हासिल’ फिल्म के लिये उन्हे फ़िल्मफ़ेयर में सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार प्राप्त हुआ. इरफान ने फ़िल्म द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग, पीकू जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इरफान खान का कहना है कि दर्शकों की सराहना किसी भी कलाकार के लिए मायने रखती है और इससे उनका उत्साहवर्धन होता है. हाल में आई उनकी हॉलीवुड फिल्म ‘इनफर्नो’ को भी दर्शकों ने खूब सराहा है. इरफान ने एक बयान में कहा, “यह मायने नहीं रखता कि आपने कितनी फिल्में की हैं. दर्शकों की सराहना से हर कलाकार खुश होता है. यह अभिनेताओं के लिए बहुत मायने रखती है.” अभिनेता की फिल्म ‘इनफर्नो’ भारत और अमेरिका में रिलीज हुई. इस फिल्म के लिए उनकी काफी प्रशंसा हुई. इरफान का कहना है यह उनके लिए पुरस्कार जैसा है. इरफान खान ने कहा कि उनका सपना है कि वह ध्यान चंद जैसे विख्यात खिलाड़ी की जीवनी पर आधारित एक फिल्म करे। हालांकि अब काफी वक्त बीत गया है, लेकिन आज भी ध्यान चंद के किरदार को निभाने के लिए वह तैयार है। यह बातें पान सिंह तोमर की डीवीडी रिलीज के पश्चात इरफान खान ने कहीं है। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद जैसे खिलाड़ी की जीवनी पर आधारित फिल्म में काम करना उनके लिए गर्व की बात होगी। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद का खेल जीवन काफी रोमांचक था, इसलिए हमें उनपर एक फिल्म जरूर बनानी चाहिए।

        वह 23 फरवरी, 1995 को लेखिका सुतपा सिकदर के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। सुतपा भी एनएसडी में उनके साथ पढ़ी हैं। उनके दो बेटे भी हैं-नाम बाबिल और अयान। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी फिल्मों व टेलीविजन के अभिनेता के तौर पर जाना जाता है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इरफान खान ने अपने 28 साल के फिल्मी करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है। बॉलीवुड के साथ-साथ इरफान हॉलीवुड में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने ‘जुरासिक वल्र्ड’ और ‘स्पाइडर मैन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है।

        एनएसडी से प्रशिक्षण लेने के बाद इरफान ने दिल्ली से मुंबई का रुख किया और वहां जाकर चाणक्य, भारत एक खोज, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात, चंद्रकांता और श्रीकांत जैसे धारावाहिकों में काम किया। वह 23 फरवरी, 1995 को लेखिका सुतपा सिकदर के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। सुतपा भी एनएसडी में उनके साथ पढ़ी हैं। उनके दो बेटे भी हैं-नाम बाबिल और अयान। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इरफान खान ने अपने 28 साल के फिल्मी करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है। बॉलीवुड के साथ-साथ इरफान हॉलीवुड में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने जुरासिक वल्र्ड और स्पाइडर मैन जैसी फिल्मों में भी काम किया है। इरफान ने पहली बार 2005 में आई फिल्म रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद फिल्म हासिल के लिए इरफान खान को उस साल का बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। उसके बाद इरफान ने लंचबॉक्स, गुंडे, हैदर, पीकू और जुरासिक वल्र्ड में भी काम किया। इरफान खान को फिल्म पान सिंह तोमर के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया और साथ ही उन्हें वर्ष 2011 में भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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