dhanteras Essay in hindi

Essay on Dhanteras in Hindi | धनतेरस का त्यौहार निबंध

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Essay on Dhanteras in Hindi :-

Dhanteras का त्यौहार पूरे भारत में पांच दिवसीय दीवाली समारोहों के रूप में मनाया जाता है। धनतेरस शब्द ‘Dhan’ का ही एक स्वरुप है, जिसका अर्थ है धन और ‘तेरास’ जिसका अर्थ तेरहवे अर्थात् 13वे, इसलिए यह हिन्दूओं के कार्तिक माह (अक्टूबर-नवंबर) में कृष्ण पक्ष के तेरहवें chand के दिन पर मनाया जाने वाला त्यौहार है।

यह दिवाली से सिर्फ दो दिन पहले मनाया जाता है, जिसमें लोग समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के साथ आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भगवान् से प्रार्थना करते हैं। धनतेरस को ‘धनत्रियोदशी’ और ‘धन्वंतरी त्रियोंदशी’ भी कहते है।

धनतेरस का त्यौहार निबंध | Essay on Dhanteras Festival in Hindi

धनतेरस 2019 When is Dhanteras?

2019 को 25 अक्टूबर को मनाया जायेगा।

धनतेरस की कहानी |  Dhanteras Story in Hindi :- 

कहानी | kahani – 1 :- 

प्राचीन कथाओं के अनुसार, Dhanteras का उत्सव राजा हिमा के सोलह वर्षीय पुत्र की kahani को दर्शाता है। भविष्यवाणी की गई थी कि वह अपने विवाह के चौथे दिन सांप के काटने से मर जायेंगे ।

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हालाँकि उनकी shaadi को चार दिन ही हुए थे, लेकिन उनकी नई विवाहित पत्नी, इस भविष्यवाणी के बारे में पहले से जानती थी इसलिए उसने अपने पति के शयन कक्ष के प्रवेश द्वार पर एक ढेर में सोने ( Gold ) और चांदी ( silver ) की बहुमूल्य धातुओं के बने सिक्कों के साथ अपने सारे गहने ( Jewelry ) बाहर रखे और पुरी जगह को दीपों से भर दिया।

फिर, रात भर उन्होंने कई बार kahaniya  सुनाईं और अपने पति की नींद को दूर करने के लिए गाने भी गाये। माना जाता है कि जब यम, मृत्यु के देवता ( Yamraj ), एक साँप के रूप धारण करके आये, तो उन्होंने खुद को राजकुमार के कक्ष में प्रवेश करने में असमर्थ पाया क्योंकि वह तेजोमय चमक-दमक और झिलमिलाते दीपकों, गहनों की रोशनी के सौंदर्य से चकित हो गए, और इसलिए वह गहने और सिक्कों के ढेर पर चढ़ गए और उनकी पत्नी के मधुर गीतों को सुनने लगे।

सुबह होते ही, वह चुपचाप राजकुमार के जीवन को बख्श कर दूर चले गये। इस तरह, युवा पत्नी ने अपने पति को मौत से बचा लिया। इसलिए, यह दिन ‘यमदीपदान’ के नाम से भी जाना जाता है।

कहानी | kahani – 2 :- 

ऐसा माना जाता है कि देवताओं और राक्षसों के बीच जो महाद्वीपीय लड़ाई हुई तो उस ladai के दौरान कई रत्न निकले समुद्र मंथन के अंत में भगवान धनवंतरि (भगवान के चिकित्सक और विष्णु के अवतार) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, जिन्होंने अमृत के लिए samudra को मंथन किया था।

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धनतेरस उत्सव | Dhanteras Celebration

धनतेरस के त्योहार को महान उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार पर, लोग dhan की देवी लक्ष्मी जी और मृत्यु के देवता यम की पूजा करते हैं, भगवान यम से अच्छे स्वास्थ्य और devi लक्ष्मी से समृद्धि के रूप में आशीर्वाद प्राप्त करते है। लोग अपने घरों और कार्यालयों को सजाते है।

परंपरागत सभी अपने घर आँगन के प्रवेश द्वार को सजाने के लिए लोग रंगीन रंगोलियां बनाकर सजावट करते है । chawal के आटे और सिंदूर से लक्ष्मी जी के छोटे पैरों के निशान बनाये जाते हैं जो कि devi लक्ष्मी के लंबे समय से प्रतीक्षित आगमन का संकेत होता है।

Dhanteras पर सोने( Gold ) या चांदी ( Silver ) जैसी कीमती धातुओं से बने नए बर्तन या सिक्के खरीदना बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह शुभ माना जाता है और यह हमारे परिवार के लिये सुख सम्रद्धि और अच्छा भाग्य लाता है।

धनतेरस की पूजा | Dhanteras Puja

धनतेरस के दिन शाम को ‘लक्ष्मी जी की पूजा’ के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। देवी लक्ष्मी जी के लिए लोग भक्ति गीत गाते हैं। सभी दुखों को दूर करने के लिए छोटे-छोटे दीपक जलाते है। धनतेरस की रात, लोग पूरी रातभर के लिए दीपक को जलाते हैं। पारंपरिक मिठाई पकायी जाती हैं और देवी माँ को प्रसाद समर्पित किया जाता हैं।

धनतेरस भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। पश्चिमी भारत के व्यापारिक समुदाय के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। महाराष्ट्र के राज्य में लोग सूखे धनिया के बीज को पीसकर गुड़ के साथ मिलकर एक मिश्रण बनाकर तैयार करते हैं और इसे ‘नैवेद्य’ कहते हैं।

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ग्रामीण इलाकों में, किसान अपने मवेशियों को सजाते हैं और पूजा करते हैं, क्योंकि वे उनकी आय के मुख्य स्रोत होते हैं। दक्षिण भारत में, लोग गायों को देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में मानते हैं, और इसलिए वहां के लोग गाय का विशेष सम्मान और आदर करते हैं।

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